Sunday, January 17, 2010

एक सवाल आप से..आप से और आप सब से

मैं आपसे...आपसे और आपसे पूछता हूँ जनाब कि अगर स्वाइन फ़्लू का इतना ही डर था तो...

  • शौक-शौक में शादी के लिए हाँ क्यों भरी?
  • हाँ भरी सो भरी लेकिन कार्ड क्यों छपवाए?
  • कार्ड छपवा लिए सो छपवा लिए लेकिन खुशी-खुशी घोड़ी क्यों चढ़े?...
  • घोड़ी चढ़े सो चढ़े लेकिन ज़ोर-शोर से बैंड-बाजा क्यों बजवाया?..
  • बैंड-बाजा बजवाया सो बजवाया लेकिन गरज-बरस के मटक-मटक के नाचे क्यों?.. 
  • मटक-मटक के नाचे लेकिन फोटोग्राफर क्यों बुलवाया? 

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4 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अरे स्वाइन फ्लू का कोई चक्कर नहीं है। ये सब जैनी हैं।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

हम्म्म यह फोटा मुझे भी इ-मेल में मिली थी :-) यह बात अलग है कि पट्टियों बाद में फोटो पर लगाई गई हैं

खुशदीप सहगल said...

जैसे शादी का कुनबा मौनव्रती है...वैसे ही हम भी चुप रहेंगे...
लेकिन एक से बढ़ कर एक सुंदर चेहरे हैं, किसी की बुरी नज़र न लगे इसलिए नजरपट्टू तो लगाने ही पड़ते है न...

जय हिंद...

ललित शर्मा said...

रिठेल प्रभु। स्वाईन मेल :>)

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